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पार्किंसंस रोग के कारण, लक्षण, निदान और उपचार

फ़िटनेस
Dr Atampreet Singh
4 min read

पार्किंसंस रोग के कारण, लक्षण, निदान और उपचार

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पार्किंसंस रोग पुरानी, बढ़ते रहने वाली और अपक्षयी बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। दुनिया में 1 करोड़ से अधिक लोग पार्किंसंस से पीड़ित हैं, और इनमें से लगभग 1% साठ साल से अधिक उम्र के हैं।

हालांकि पार्किंसंस रोग के लिए कोई स्थापित अध्ययन आयोजित नहीं किया गया है, फिर भी रोग की घटना दर से पता चलता है कि प्रति वर्ष हर 1, 00,000 लोगों में से  1.5 से लेकर 20 लोगों में यह होता है। शरीर का हिलना-डुलना और धीमापन पार्किंसंस रोग की पहचान है। यह रोग मस्तिष्क के एक भाग 'स्टिशिया नाइग्रा' में उत्पन्न होने वाले रासायनिक 'डोपामाइन' की कमी के कारण होता है, जो कि शरीर की मांसपेशियों की बाधारहित और समन्वित गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होता है।

पार्किंसंस रोग के कारण क्या हैं?
  1. आनुवंशिक कारक:
 
  • पार्किंसंस के अधिकांश मामले सीधे-सीधे आनुवंशिक नहीं होते हैं।
 
  • पार्किंसंस की शिकायत वाले लगभग 3% से 5% लोगों का कोई न कोई रिश्‍तेदार इस बीमारी से ग्रसित होता है।
  • रोग से प्रभावित प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदार, जैसे कि माता-पिता या भाई-बहन, में बीमारी विकसित होने की संभावना 4 से 9 प्रतिशत अधिक होती है।2. 
 

 

2. पर्यावरणीय कारक:


 
  • खाद्य उत्पादों में पेस्‍टिसाइड्स यानी कीटनाशकों के प्रयोग और हर्बिसाइड्स के संपर्क में आने से न्‍यूरोलॉजिकल यानी स्नायविक क्षति हो सकती है।
 
  • ग्रामीण परिवेश के कारण व्यक्ति के पेस्‍टिसाइड्स और विलायकों के संपर्क में आने में वृद्धि हो सकती है।
  • कुएं का पानी जिसमें मेटल्‍स मिले हों, पीने से पार्किंसंस रोग हो सकता है।
 

 



पार्किंसंस रोग के लक्षण क्या हैं?

आमतौर पर 50 से 60 आयु वर्ग के लोग इस रोग की चपेट में आते हैं। रोग के कुछ प्रमुख लक्षण निम्‍नलिखित हैं:

 
  • हाथ, हाथ, पैर, जबड़े और चेहरे का कांपना
 
  • हाथ, पैर और धड़ में अकड़न
  • हाथ-पैर घुमाने में सुस्ती
  • संतुलन और समन्वय का खराब होना
 

 

 

पार्किंसंस रोग का निदान कैसे किया जाता है?

पार्किंसंस रोग का निदान करने के लिए निम्‍नलिखित पर ध्‍यान दें:
  1. रोगी के नैदानिक ​​इतिहास की जानकारी आवश्यक है।
  2. रोगी को व्यापक शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल जांच करानी पड़ती है। 
  3. निम्‍नलिखित के मूल्‍यांकन के लिए मस्तिष्क की मैग्‍नेटिक रेजोनैंस इमेजिंग (एमआरआई) किया जा सकता है:

    • सेरेब्रोवास्कुलर रोग (मल्टी-इन्फर्क्ट स्टेट, क्रोनिक सबड्यूरल हेमेटोमा सहित)
    • जगह घेरने वाले घाव
    • सामान्य- दबाव वाला हाइड्रोसिफलस

4. रोग के विशिष्ट मामलों में पीईटी या स्पैक्ट स्कैन कराने पर विचार किया जा सकता है।


पार्किंसंस रोग का इलाज कैसे किया जाता है?

    1. कई दवाएं हैं जो लक्षणों को दूर कर सकती हैं, रोग को काफी धीमा कर सकती हैं, और रोग के साथ जीना आसान बना सकती हैं। पार्किंसंस रोग के उन्नत चरण में, रोगी को सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है, जिसे डीप ब्रेन स्‍टिमुलेशन कहते हैं।
    2. पार्किंसंस रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए व्यायाम और अच्छी आहार संबंधी आदतें आवश्यक हैं।
 
  • दवाओं के साथ-साथ स्‍पीच थिरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और फिजिकल थेरेपी भी जरूरी है।
 
  • जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, निम्‍नलिखित कुछ समस्‍याएं उभर कर सामने आ सकती हैं:
  • व्यक्तित्व में परिवर्तन
  • अवसाद
  • निगलने की बीमारी
  • ऊंघना
  • थकान
  • डिमेंशिया
 

 

 देखभाल करने वाले की क्या भूमिका होती है?

 
  • सुनिश्चित करें कि बीमारी और इसके प्रभाव को पूरी तरह से समझा गया है।
 
  • सुनिश्चित करें कि उपचार सुचारू तरीके से किया जाता है।
  • जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, यह सुनिश्चित करें कि मरीज की सहूलियत को प्राथमिकता दी जाए और इस बारे में कोई समझौता न किया जाए।
  • अच्छे मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए रोगी को गतिविधियों में व्यस्त रखना जारी रखें।
 

हालांकि पार्किंसंस रोग का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसकी शुरुआत और प्रगति बेहद धीमी होती है और लक्षणों को उपचार से नियंत्रित किया जा सकता है जो रोगी के लिए जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक है। स्‍थिति बिगड़ने से सम्‍बंधित किसी भी संकेत के प्रति हमेशा सतर्क रहना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार और फिजिकल थिरेपिस्‍ट की सहायता से निर्देशों का पालन करना चाहिए।

डॉ. आतमप्रीत सिंह, न्यूरोलॉजी विभाग, फोर्टिस अस्पताल, नोएडा में सीनियर कंसल्‍टेंट हैं।

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