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गर्भ में बच्चे लात क्यों मारते हैं?

फ़िटनेस
Dr Kavitha Lakshmi Easwaran
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गर्भ में बच्चे लात क्यों मारते हैं?

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गर्भावस्था के १८-२२ वें हफ्ते में माता को पहली बार अपने बच्चे के लात मारने का एहसास होता है। जिसे हम “गर्भस्पंदन” के नाम से जानते हैं। किसी भी माता के लिए यह एक काफी सुनहरा एहसास होता है। माता के गर्भ में शिशु द्वारा लात मारना उसकी गतिविधियों से जुड़ा एक सबसे

हांलाकि, लात मारने के पहले ही बच्चों की गतिविधियों को अल्ट्रासाउंड जांच में भी देखा जा सकता है, लेकिन गर्भवती होने के १८ से २२ हफ्तों बाद जब बच्चा एक अच्छा खासा आकार ले लेता है तभी माता को इसका एहसास होता है। अल्ट्रासाउंड जांच में हमें लात मारने, घुमने, मुक्का मारने, हाथ-पैर के लचीलेपन और उन्हें फैलाने, शारीरिक खिंचाव, हिचकी और जम्हाई, अंगूठा चूसने, सांस संबंधी गतिविधियों जैसे बच्चे के हर प्रकार के क्रियाकलापों को देखने में मदद मिलती है। लेकिन, लात मारने, मुक्का मारने और कभी-कभार आने वाली हिचकियों को मां खुद महसूस कर सकती है।  

गर्भ में बच्चे या तो सोते हैं या कसरत करते हैं, और लात मारना उनका कसरत करना ही है। यह सिर्फ उन्हें स्वस्थ ही नहीं रखता बल्कि उनकी हड्डियों और जोड़ों के ठीक-ठाक वृद्धि और विकास के लिए भी अहम होता है। भ्रूण की गतिविधि में किसी भी प्रकार की रुकावट, खासकर एमनियोटिक पट्टी या गर्भाशय संबंधी विसंगतियों की वजह से पैदा होने वाली रुकावट, छोटे जोड़ों, अंग दोष और नाजुक हड्डियों जैसे जन्मजात विकारों की ओर ले जा सकती है, जिनसे शिशु के अंगभंग होने का खतरा रहता है।  

एमनियोटिक थैली बच्चे के लिए एक निजी तालाब या एक बहुत बड़े स्नानगृह की तरह होती है, जिसमें बच्चा लातें मारकर या घूम-घूम कर मज़े लेता रहता है। वहीं गर्भ में मौजूद द्रव पदार्थ (मीडिया) बच्चे को आसानी से लात मारने और घूमने में मदद करता है।

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यह देखा जाता है कि गर्भ में लड़कियों की अपेक्षा लड़के ज़्यादा हिलते-डुलते हैं। बच्चे के आकार के अलावा लात मारने की तीव्रता मुख्यत: दो घटकों पर निर्भर करती है, पहला पेट का ढीलापन और दूसरा पेट की ऊपरी सतहों की मोटाई। उदाहरण के लिए, कोई भी मां गर्भ में अपने दूसरे बच्चे की गतिविधियां ज़्यादा महसूस करती है, क्योंकि पहले बच्चे के गर्भावस्था में खिंचाव और लचीलेपन में कमी आने और रेक्टस मांसपेशियों के कड़कपन की वजह से उसके पेट की मांसपेशियां ढीली हो चुकी होती हैं। वहीं, मोटापे से ग्रस्त माताओं या पेट की मोटी सतहों वाली माताओं में भ्रूण गतिवधियों के कम तीव्रता वाले एहसास और एक काफी समय बाद होने वाले एहसास भी देखे गए हैं।  

माता के आसपास मौजूद पर्यावरण की प्रतिक्रिया के रूप में बच्चा गतिविधि करता है। अत्यधिक ध्वनि या शोर, प्रकाश या यहां तक कि कुछ आहार भी बच्चे को लात मारने और हिलने-डुलने के लिए प्रेरित करते हैं।  

शिशुओं को आरामदेह होने के लिए भी खिंचाव और हिलने-डुलने की आवश्यकता पड़ती है। अगर माता उसके अनुरूप हिलती-डुलती या गतिविधि करती है, तो अक्सर बच्चों को आराम मिलता है और वे सो जाते हैं।  

एक दिन में शिशु औसतन १५-२५बार लातें मारता या दूसरी गतिविधियां करता है। हर बच्चा अलग होता है, और इसलिए उनकी गतिविधियां भी अलग-अलग होती हैं। कुछ शिशु दिनभर सोते रहते हैं और रात में हिलते-डुलते हैं या फिर इसका उलटा भी करते हैं। जबकि दूसरे तरह के बच्चे दिन और रात दोनों समय गतिविधियां करते हैं। गर्भ में शिशु पूरे १८ घंटे तक सोते हैं, आम तौर पर हर ४५-५० मिनट के अंतराल पर वे सो जाते हैं।  

अधिकतर गर्भवती महिलाएं भोजन ग्रहण करने के बाद बच्चों की गतिविधियां महसूस करती हैं, जब वे सक्रिय होते हैं, और शाम के वक्त भी बच्चे हिलते-डुलते हैं। किसी माता को दिनभर में कम से कम १०-२० ठीकठाक गतिविधियों का अंदाज़ा लगता है। १० से कम गतिविधियां महसूस होने पर माता के लिए चिंता की बात हो सकती है। इस मानक के आधार पर मां अपने बच्चे के भला चंगा होने के बारे में अंदाज़ा लगा सकती है।

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ध्वनि उत्तेजन, माता के पेट पर स्पर्श उत्तेजन या माता या पिता की परिचित आवाज़ संबंधी उत्तेजन पर बच्चे द्वारा कम या कोई भी गतिविधा ना होना या फिर लगातार एक या दो दिन तक बच्चे की कोई भी गतिविधि पता ना चलना, ये सभी गंभीर चेतावनी के संकेत हैं। कम गतिविधि का अर्थ है कि बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन या पोषक तत्व या पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रहा है।  

अगर मां अपने बच्चे की गतिविधियां गिनना और उसके एहसास को समझना सीख जाए, तो फिर बच्चे पर निगरानी रखने वाला उससे बेहतर और सर्वश्रेष्ठ चौकीदार कोई नहीं हो सकता।  

इन सभी बातों का सार निकालें तो, गर्भ में शिशु का लात मारना और दूसरी गतिविधियां उसके अच्छी वृद्धि और विकास के लिए सबसे अहम हैं। इनसे आपके पुत्र या पुत्री की हड्डियों और जोड़ों का बेहतर विकास हो रहा होता है!

डॉ. कविता लक्ष्मी ईस्वरन, मदरहुड अस्पताल, बैंगलोर में कार्यरत एक प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं।

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