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व्यायाम से होने वाले मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ

मानसिक स्वास्थ्य
Rachna Muralidhar
4 min read

व्यायाम से होने वाले मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ

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व्यायाम करना सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद माना जाता है। पिछले 2 दशकों में इस क्षेत्र में व्यापक शोध हुए हैं और नियमित व्यायाम करने से लोगों को निश्चित रूप से काफी लाभ हुआ है। व्यायाम की विशेषता यह है कि यह न केवल किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट में योगदान देता है, बल्कि यह मानसिक सेहत बेहतर करने में भी अपनी भूमिका निभाता है। यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि ऐसा मन-शरीर संबंध के कारण संभव होता है।

हम सोच सकते हैं कि मन-शरीर संबंध का क्या अर्थ है। इसे समझने का सबसे अच्छा तरीका फ्लू को समझना है। क्या फ्लू केवल शरीर को प्रभावित करता है या क्या इसका मन पर भी प्रभाव पड़ता है और हम विचार, भावना, अहसास के स्तर पर भी कैसा महसूस करते हैं? इसका सर्वाधिक निश्चित जवाब यह है कि हमारा पूरा अस्‍तित्‍व प्रभावित होता है। लेकिन इसका उल्‍टा भी सच है। भावनात्मक उद्वेग में भी शरीर संबंधी समस्‍याएं पैदा करने की क्षमता होती है, जिसके परिणामस्वरूप आमतौर पर दर्द और पीड़ा जैसी शारीरिक लक्षण दिखाई देते हैं, जो चिकित्‍सकीय भाषा में व्‍याख्‍यायित नहीं हो पाते हैं। ये स्‍थितियां अक्सर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को चकित करती हैं। इसलिए इस लेख में हम उस मन और शरीर के संबंध को समझाने की कोशिश करेंगे।

वर्किंग आउट यानी व्‍यायाम करना मन-शरीर संबंध को बढ़ाने का सबसे ठोस एवं वास्‍तविक तरीका है, शायद इसीलिए बुद्ध ने कहा, "शरीर को अच्‍छी तरह से स्‍वस्‍थ बनाये रखना एक कर्तव्य है ... अन्यथा हम मन को मजबूत और स्पष्ट नहीं रख पाएंगे।" इसके साथ ही, मैं अपने क्‍लिनिकल प्रैक्‍टिस में अधिकांश ग्राहकों को व्यायाम की सलाह देती हूं और वास्तव में कई लोगों ने समग्र जागरूकता बनाने में व्‍यायाम के सहायक होने का उल्लेख भी किया है।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि व्यायाम में माइंडफुलनेसयानी सचेत होने की अंतर्निहित क्षमता होती है। हमारे ऑटोपायलट के विपरीत, जहां हम अतीत या भविष्य को लेकर उलझे हुए होते हैं, व्‍यायाम में ध्यान आकर्षित करने और वर्तमान क्षण के प्रति पूरी तरह से जागरूकता लाने की क्षमता है। यह रिफोकस यानी फिर से ध्‍यान केन्‍द्रित करने में सहायक है। यह महत्वपूर्ण क्षमता, सीधे-सीधे लचीलेपन को बढ़ावा देती है। इसलिए व्‍यायाम के दौरान जहां ध्यान शरीर पर केन्‍द्रित किया जाता है, वहीं मानसिक रूप से केन्‍द्रित होने का प्रशिक्षण इसमें अंतर्निहित होता है। भौतिक शरीर की उपेक्षा करने के नतीजे अधिक ठोस एवं स्‍पष्‍ट होते हैं, क्योंकि एक पल के लिए ध्‍यान का हटना भीषण चोट का कारण बन सकता है। इसलिए आम तौर पर अत्‍यधिक ध्यान केन्‍द्रित करने और जागरूकता पर खास तौर से नजर रखनी चाहिए, और यह स्‍वयं में ध्यान या माइंडफुलनेस यानी सचेत रहने का अभ्यास होता है।

यहां व्यायाम के कुछ महत्वपूर्ण मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य लाभ बताये गये हैं:


Benefits Of Exercise

1. आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को बढ़ाता है: आप सोचेंगे कि कोई व्यक्ति खुद को कैसे देखता है, इसमें व्यायाम का सीधा प्रभाव कैसे पड़ता है। इसका स्पष्टीकरण यह है कि व्यायाम अनुशासन लाता है, और यह अनुशासन आपको दो तरीकों से अंतर देखने में सक्षम बनाता है। एक तो आप सीधे-सीधे शरीर के आधार पर देख सकते हैं, और दूसरा तरीका वह है जिससे हम भावनात्मक उथल-पुथल से निपटते हैं। जैसा कि पहले इस लेख में बताया गया है, रीफोकसिंग यानी ध्‍यान केन्‍द्रित करने के लिए कम प्रयास करने पड़ते हैं। निश्चित रूप से इसमें इस समझ का बड़ा योगदान है कि हम खुद को कैसे देखते हैं। और वास्तव में 'प्रसन्‍नता' हासिल कर पाने में इसकी एक भूमिका है।

2. मनोदशा पर असर छोड़ता है: व्‍यायाम का हमारी मनोदशा पर तुरंत प्रभाव पड़ता है। शारीरिक गतिविधि और अन्य गतिविधियों जैसे कि टेलीविजन देखने, पढ़ने आदि के प्रभाव की तुलना करने के लिए एक अध्ययन किया गया था, जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिभागियों ने अन्य गैर-शारीरिक गतिविधियों की तुलना में शारीरिक गतिविधि के बाद अधिक सक्रिय और शांत महसूस किया। उन्होंने यह भी पाया कि शुरुआत में मनोदशा सही नहीं होने के बावजूद, मनोदशा पर शारीरिक गतिविधि का सर्वोत्‍तम प्रभाव पड़ा।

3. हॉबी और ‘हो जायेगा का भाव: यह मुश्‍किल हालात में एंकर यानी सहारा की तरह काम कर सकता है। हम बहुत सारे मामलों में नियंत्रण रखने का भ्रम पाले रहते हैं, जबकि वास्‍तव में बहुत कम चीजें ही हमारे नियंत्रण में होती हैं। अक्‍सर हम खुद को असहाय और तनावग्रस्त महसूस करते हैं, और यह भूल जाते हैं कि हम ऐसी ही अन्य समान स्थितियों से सुरक्षित निकल आये हैं और यह स्‍थिति भी वैसे ही निपट जायेगी। इसलिए ऐसी स्‍थिति में व्यायाम, अधिक उत्पादक तरीके से ऊर्जा को व्‍यवस्‍थित करने में सहायक हो सकता है।

4. समाजिकीकरण का एक मंच है: अरस्तू ने कहा है कि "मनुष्य स्वभाव से, एक सामाजिक प्राणी है"। संबंधों के साथ  हम आराम, पोषण और वृद्धि महसूस करते हैं। शोध बताते हैं कि सामाजिकीकरण यानी समाज के साथ मिलना-जुलना मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित चिंताओं से निपटने में सहायक हो सकता है। कोई खेलकूद या व्यायाम सुरक्षित स्थान, संभावित दोस्ती के लिए जगह, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि की एक जगह बन सकता है!

यहां व्यायाम के 2 सबसे बड़े जैविक प्रभाव बताये गए हैं:


Benefits Of Exercise

1. डोपामाइन और एंडोर्फिन: ये मस्तिष्क द्वारा उत्पादित रसायन हैं, जिनका काफी अधिक योगदान है। व्यायाम एक गतिविधि है जो इनके उत्पादन में स्‍वाभाविक वृद्धि करता है।

एंडोर्फिन मस्तिष्क द्वारा निर्मित प्राकृतिक दर्द निवारक हैं और आनंद तथा उत्साह की भावनाओं से जुड़े होते हैं।

डोपामाइन प्रतिफल और सुदृढीकरण, बुनियादी प्रेरणा और बेहतर मनोदशा के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2. बेहतर भूख और नींद को बढ़ावा देते हैं: ये पुनर्स्थापनात्मक जैविक गतिविधियां हैं और हमारे दैनिक मनोदशा और ऊर्जा के स्तर पर भारी प्रभाव डालती हैं। व्यायाम शरीर और मन दोनों के संपूर्ण संभावित कामकाज को, यहां तक ​​कि हर रोज के तनावग्रस्‍त मौकों और इससे जुड़े संकट दोनों के मामले में भी, बढ़ावा देता है।

 

मानसिक बीमारियों से निपटने में व्यायाम की भूमिका


Benefits Of Exercise
  • शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि हल्के से लेकर मध्यम स्तर के अवसाद के इलाज के लिए व्‍यायाम करना, अवसादरोधी दवा जितना ही कारगर हो सकता है, और अवसाद के जोखिम को 26% तक कम करने में भी मदद करता है (हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ)।
  • चिंता से तुरंत हृदय गति बढ़ जाती है और सांस की तकलीफ होने लगती है। इन लक्षणों को माइंडफुलनेस यानी सचेतन गतिविधि के साथ नियमित व्यायाम करके कम किया जा सकता है। अधिक अभ्यास के साथ, चिंता होने पर भी शरीर कम तीव्रता के साथ प्रतिक्रिया करता है, जिससे चिंता से निपटना आसान हो जाता है।
  • इस बात के सबूत मिले हैं कि व्यायाम पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के इलाज में मदद कर सकता है। खास तौर पर देखें तो व्यायाम, विशेष रूप से मन-शरीर और कम तीव्रता वाले एरोबिक व्यायाम, पीटीएसडी के लक्षणों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।(कोहेन और शामुस, 2009)
इसलिए, हमारे जैविक कामकाज में, हम स्‍वयं को कैसे महसूस करते हैं, तनाव से कितने प्रभावी ढंग से निपटते हैं और कैसे हम रोजमर्रा की जिंदगी कैसे जीते हैं, इन सबमें व्‍यायाम की बड़ी भूमिका है। इसमें बहुआयामी लाभ स्पष्ट हैं। अगर हम सप्ताह में कुछ घंटों के लिए व्यायाम करने में निरंतरता हासिल कर लेते हैं, तो निश्चित रूप से हमारे समग्र स्वास्थ्य में ठोस वृद्धि होगी। व्यायाम का मतलब केवल जिम या स्टूडियो में जाना नहीं है, यह एक व्यक्तिगत गतिविधि के रूप में भी किया जा सकता है और ऐसे असंख्य चैनल हैं जो इसमें मदद करते हैं। व्यायाम एक मुद्रा में 8 या 16 तक गिनती गिनने तक सीमित नहीं है, इसमें खेल और नृत्य जैसी गतिविधियां भी शामिल हो सकती हैं। इस तरह देखें तो विकल्प कई हैं और संभावनाएं अपार हैं। तो आइए, सबसे यथार्थवादी विकल्प चुनें, और निरंतरता बनाये रखें, क्योंकि यह हमारे जीवन को लेकर होने वाले अनुभव में वृद्धि करता है!

रचना मुरलीधर मनोवैज्ञानिक हैं और एमपॉवर - द सेंटर, केंद्र, बेंगलुरु में आउटरीच एसोसिएट हैं।

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