गर्भनिरोधक गोलियां: उपयोग, दुष्‍प्रभाव और विकल्प
Health Hunt Please change Orientation

Want to unlock the secrets of holistic health?

Yes, tell me more No, I like living in oblivion
3
Notifications Mark all as read
Loader Image
No notifications found !
  • English
  • हिन्दी
3
Notifications Mark all as read
Loader Image
No notifications found !
हमारे साथ साझा करें
  • English
  • हिन्दी
Default Profile Pic

0 New Card

गर्भनिरोधक गोलियां: उपयोग, दुष्‍प्रभाव और विकल्प

फ़िटनेस
Nirmala Chandra shekar
5 min read

गर्भनिरोधक गोलियां: उपयोग, दुष्‍प्रभाव और विकल्प

  • 2.2k Likes
  • 0 Comment

गर्भनिरोधक गोलियां (ओसीपी) गर्भावस्था को रोकने या आपकी माहवारी को नियमित करने की दवा हैं। गर्भनिरोधक गोलियां के कुछ ब्रांड मुंहासे के इलाज में इस्तेमाल किये जा सकते हैं या आपातकालीन गर्भनिरोधक के लिए इनका उपयोग "सुबह के बाद" खाने वाली गोली के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि गर्भ निरोधकों गोलियों का सेवन करने से पहले आपको डॉक्टर या स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी के प्रिस्क्रिप्शन यानी पर्ची की जरूरत पड़ती है।

गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के इलाज के लिए किया जाता है:
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस): पीसीओएस एक प्रकार का हार्मोन से संबंधित असंतुलन है जो अनियमित माहवारी, मुंहासे और अतिरिक्त बालों के विकास का कारण बनता है। ऐसी लड़कियों के लिए जिनकी माहवारी अनियमित है (बहुत कम या बिल्कुल भी नहीं), माहवारी को नियमित करने के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन हार्मोन के स्तर को कम करने में सकारात्मक रूप से कारगर है। जब हार्मोन सामान्य स्तर पर होते हैं, तो मुंहासे और बालों के विकास संबधी समस्याएं अक्सर सुधर जाती हैं।
  • एंडोमेट्रियोसिस: एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित अधिकतर लड़कियां अपने माहवारी के दौरान ऐंठन या पेल्विक दर्द का अनुभव करती हैं। अक्सर एंडोमेट्रियोसिस के इलाज के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेने की सलाह दी जाती है और ये गोलियां माहवारी को अस्थायी रूप से रोक देती हैं। एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित युवा महिलाओं के लिए माहवारी दर्द का कारण बन सकती है, इसलिए माहवारी को अस्थायी रूप से रोकने से आमतौर पर ऐंठन और पेल्विक दर्द में सुधार होगा। 
  • एमेनोरिया (माहवारी की अनुपस्थिति): कम वजन, तनाव, या अत्यधिक व्यायाम वाली जीवन शैली जैसे कुछ कारक हैं जिनकी वजह से एमेनोरिया होता है। हार्मोन को संतुलित करने के लिए डॉक्‍टर एस्ट्रोजन को बदलने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेने की सलाह दे सकते हैं, जो माहवारी चक्र को नियमित करने में सहायक है। स्वस्थ हड्डियों के लिए एस्ट्रोजन का सामान्य स्तर और स्वस्थ वजन महत्वपूर्ण हैं। अगर माहवारी का न होना, कम वजन या खानपान की गड़बड़ी के कारण है, तो सबसे अच्छा उपचार सामान्य स्वस्थ वजन हासिल करना और शरीर की रूपरेखा और सेहत के लिए परामर्श लेना है।
  • माहवारी में होने वाली ऐंठन: जब डॉक्‍टर की पर्ची के बिना सीधे दुकान से दवाएं लेना गंभीर ऐंठन के मामले में मददगार नहीं होती है, तो गर्भनिरोधक गोलियां समाधान हो सकती हैं क्योंकि वे ओव्यूलेशन यानी डिम्‍बोत्‍सर्जन को रोकती हैं और माहवारी की ऐंठन को कम करती हैं।
  • प्रीमेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस): एक युवा महिला में उसकी माहवरी से 2 सप्ताह पहले तक मुहांसों के साथ मिजाज में उतार-चढ़ाव, वजन बढ़ना, स्तन में दर्द और पेट फूलना जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में, गर्भनिरोधक गोलियां ओल्‍यूलेशन को रोकने और हार्मोन के स्तर को संतुलित रखने में मदद करने के लिए दी जा सकती हैं। इससे, खास तौर पर जब गर्भनिरोधक गोलियां लगातार दी जाती हैं तो पीएमएस के लक्षणों में सुधार हो सकता है। 
  • प्राइमरी ओवेरियन इनसफिशिएंसी (पीओआई): गर्भनिरोधक गोलियां अक्सर उन लड़कियों को दी जाती हैं जिनके अंडाशय विकिरण और/या कीमोथेरेपी के कारण पर्याप्त मात्रा में एस्ट्रोजन का उत्पादन नहीं कर रहे होते  हैं या जिनको टर्नर सिंड्रोम जैसी आनुवंशिक समस्‍या या अन्य समस्‍याएं होती हैं। इस उपचार का उद्देश्य माहवारी को नियमित करना और हड्डियों को स्वस्थ रखना है। 
  • माहवारी का अधिक होना: गर्भनिरोधक गोलियां अत्‍यधिक माहवारी के दौरान दी जाती हैं क्योंकि ये गोलियां माहवारी के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रवाह और अवधि को कम कर सकती हैं।
  • मुंहासे: मध्यम से लेकर गंभीर प्रकार तक के मुंहासों के मामले में, कभी-कभी सामान्य निर्धारित दवाएं भी काम नहीं करती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में, गर्भनिरोधक गोलियां दी जा सकती हैं। गोली में मौजूद हार्मोन मुंहासों को बनने से रोकने में मददगार हो सकते हैं। हालांकि आपकी त्वचा में सुधार दिखने में कई महीने लग सकते हैं, इसलिए धैर्य बनाये रखें। 
गर्भनिरोधक गोलियां (ओसीपी) के सेवन के अन्य चिकित्सकीय लाभ हैं। गर्भनिरोधक गोलियों का सही सेवन अत्‍यधिक माहवारी के रक्तस्राव को कम करने में सहायक है। ये एनीमिया को रोकती हैं। एनीमिया यानी खून की कमी, फेफड़ों से ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जोने वाली लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होने के कारण होता है। गर्भनिरोधक गोलियां एंडोमेट्रियल (गर्भाशय का अस्तर) कैंसर, ओवेरियन कैंसर और ओवेरियन सिस्‍ट होने की संभावना को कम करने में मदद करती हैं।

गर्भनिरोधक गोलियों (ओसीपी) के दुष्प्रभाव क्या हैं?
  1. इंटरमेंस्ट्रुअल स्‍पॉटिंग- अपेक्षित माहवारियों के बीच योनि से रक्तस्राव होना आम है। यह आमतौर पर गोलियां लेना  शुरू करने के 3 महीने के अंदर बंद हो जाता है।
  2. उबकाई- कुछ लोगों को गोली लेते समय हल्की मतली यानी उबकाई का अनुभव होता है, लेकिन ये लक्षण आमतौर पर थोड़ी देर बाद कम हो जाते हैं।
  3. माहवारी का नहीं होना - गोली के उचित उपयोग से भी कई बार माहवारी नहीं हो सकती है। इसे प्रभावित करने वाले कारकों में तनाव, बीमारी, यात्रा, और हार्मोनल या थायरॉयड संबंधी असामान्य सथितियां शामिल हैं।
  4. सिरदर्द और माइग्रेन – आमतौर पर इन लक्षणों में समय के साथ सुधार हो जाता है, लेकिन अगर गोली लेने से गंभीर सिरदर्द होता है, आपको डॉक्‍टर से सलाह लेनी चाहिए। 
  5. स्तनों का मुलायम पड़ना – गर्भनिरोधक गोलियां स्तनों के आकार में वृद्धि या उनके मुलायम पड़ने का कारण हो सकती हैं। हालांकि यह प्रभाव आमतौर पर गोली शुरू करने के कुछ सप्ताह बाद समाप्‍त हो जाता है।
  6. मनोदशा में बदलाव- गर्भ निरोधक गोलियों से आपकी मनोदशा प्रभावित हो सकती है और अवसाद का खतरा बढ़ सकता है या अन्य भावनात्मक परिवर्तन हो सकते हैं।
  7. कामेच्छा में कमी- गर्भनिरोधक गोलियों में मौजूद हार्मोन कुछ लोगों में सेक्स ड्राइव या कामेच्छा को प्रभावित कर सकता है। अगर कम हुई कामेच्छा बनी रहती है और बेचैन करती है, तो इस बारे में डॉक्‍टर या स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी से बातचीत करनी चाहिए।
ओसीपी के संभावित विकल्प क्या हैं?

कंडोम - यह गर्भनिरोध की बाधा विधि है जो शुक्राणु को अंडे की कोशिकाओं के संपर्क में आने से रोकती है। पुरुष वाले कंडोम म्यान की तरह होते हैं जिन्हें लिंग के ऊपर पहना जाता है। इसी तरह, महिला के उपयोग वाले कंडोम एक थैली जैसे होते हैं, जिसके प्रत्येक छोर पर एक रिंग बनी होती है। इसे योनि में डाला जाता है।

डायाफ्राम - यह एक उथला, गुंबद के आकार का रिम वाला कप होता है जो सर्विक्‍स यानी गर्भाशय ग्रीवा को अवरुद्ध करने के लिए योनि में रखा जाता है। शुक्राणुनाशक लगे होने के कारण, यह शुक्राणु और अंडे को मिलने से रोकता है। इसके नुकसान भी हैं, जिनमें मूत्र मार्ग का संक्रमण और योनि में जलन शामिल है। जिस पदार्थ से डायाफ्राम बना है, उससे या शुक्राणुनाशक से प्रतिक्रिया के कारण चिड़चिड़ाहट महसूस हो सकती है।

नुवारिंग (योनि की अंगूठी) - प्लास्टिक की अंगूठी को योनि में डाला जाता है, और ओव्यूलेशन को रोकने के लिए योनि हार्मोन जारी करती है। प्रत्येक महीने, इसे 3 सप्ताह के लिए डाला जाता है और जिस सप्‍ताह माहवारी होती  है, उस 1 सप्ताह के लिए हटा दिया जाता है। ये हार्मोन गोलियों के समान होते हैं, इसलिए गोलियों जैसे ही इनके दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

अंतर्गर्भाशयी उपकरण (आईयूडी) - प्लास्टिक और तांबे से बना एक छोटा-सा उपकरण डॉक्टर के क्‍लिनिक में गर्भाशय में डाला जाता है। आईयूडी हार्मोन वाले या गैर-हार्मोन वाले हो सकते हैं। हार्मोन वाले आईयूडी सर्विक्‍स के बलगम को गाढ़ा करते हैं और ओव्यूलेशन को रोकते हैं। हालांकि गैर-हार्मोन वाले आईयूडी गर्भाशय में जलन की प्रतिक्रिया पैदा करते हैं जो शुक्राणु के लिए विषाक्त है।

यह 10 साल तक कारगर रहता है और गर्भावस्था को रोकने में लगभग 100 प्रतिशत प्रभावी है।

कंट्रासेप्‍टिव इम्‍प्‍लांट्स यानी गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण - एक छोटी, प्लास्टिक की छड़ को एक हल्‍की सर्जरी द्वारा ऊपरी बांह (अपर आर्म) में प्रत्यारोपित किया जाता है। अगले 3 वर्षों के लिए, यह गर्भाशय सर्विक्‍स बलगम को गाढ़ा बनाने, एंडोमेट्रियल अस्तर को पतला करने, और ओव्यूलेशन को रोकने के लिए के लिए हार्मोन जारी करता है। यह लगभग 100 फीसदी प्रभावी है।

नसबंदी - पुरुषों में अंडकोष से लिंग तक शुक्राणु पहुंचाने वाली नलियों को अवरुद्ध करने या काटने के लिए सर्जरी की जाती है, जबकि महिलाओं की नसबंदी में, सर्जरी से फैलोपियन ट्यूब को ब्लॉक कर दिया जाता है। सामान्य तौर पर यह  स्थायी होती है।

इसके अलावा, अन्य गर्भनिरोधक इंजेक्शन भी हैं जो 100 प्रतिशत प्रभावी माने जाते हैं, जैसे कि डेपो-प्रोवेरा डिम्बोत्सर्जन को रोक देता है और शुक्राणु को अंडे की कोशिकाओं तक पहुंचने की संभावना कम करने के लिए सर्विक्‍स के म्‍यूकस को गाढ़ा करता है, जैसा कि गर्भनिरोधक गोलियां भी करती हैं। यह प्रोजेस्टिन-ओनली गर्भनिरोधक (पीओसी) है।

शॉट का लाभ यह होता है कि आपको इसे हर दिन नहीं लेना है, लेकिन आपको हर 3 महीने में शॉट लगाना याद रखना होगा और यह डॉक्टर के क्‍लिनिक में ही होना चाहिए।

डॉ. निर्मला चंद्रशेखर, बीजीसी ग्‍लिनिएगल्‍स ग्‍लोबल हॉस्‍पिटल्स, बेंगलुरु में कंसल्टेंट- ऑब्सटेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी और गायनेक ऑन्कोलॉजी हैं।

Comment (0)

Submit Loader Image
Nirmala Chandra shekar

Nirmala Chandra shekar

I am an Obstetrician and Gynaecologist.Also specialised in gynaec oncology and laparoscopic surgeries.
Nirmala Chandra shekar

Nirmala Chandra shekar

I am an Obstetrician and Gynaecologist.Also specialised in gynaec oncology and laparoscopic surgeries.


By clicking “Accept” or continuing to use our site, you agree to our Privacy policy for website

Ask the Experts

Some things to keep in mind

Have a question related to the following? We’d love to help. Please submit your query, and feel free to leave your name or choose the option of staying anonymous. If our team of experts are able to respond, you will be notified via email, and an article might be published with the response.



  • Nutrition
  • Fitness
  • Organic Beauty
  • Mental Wellbeing
  • Love
Cancel

Keep me anonymous. Cancel

Thank you! We look forward to answering your question.

All responses can be seen in the ‘My Hunts’ section.