एलर्जेन अटैक: क्यों आपके दादा-दादी को भोजन से एलर्जी नहीं हुई, लेकिन आपको है
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एलर्जेन अटैक: क्यों आपके दादा-दादी को भोजन से एलर्जी नहीं हुई, लेकिन आपको है

फ़िटनेस
Lakshmi Devan
2 min read

एलर्जेन अटैक: क्यों आपके दादा-दादी को भोजन से एलर्जी नहीं हुई, लेकिन आपको है

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क्या हमारे दादा-दादी सुपरमैन थे? उन्होंने अपनी सुपर रोग प्रतिरोधक क्षमता कहां से पायी थी?

खाद्य पदार्थों से होने वाली एलर्जी से दुनिया भर में लगभग 220-250 मिलियन लोगो के प्रभावित होने का अनुमान है, और आमतौर पर वयस्कों (1-2 प्रतिशत) की तुलना में बच्चों (5-8 प्रतिशत) में अधिक देखी जाती है। पिछले एक दशक में, किसी भी ज्ञात देश में एलर्जी से संबंधित मामलों में कमी होने की रिपोर्ट नहीं मिली है, और वास्‍तव में देखें तो एलर्जी के मामले बढ़े ही हैं। सेरेना विलियम्स, ड्रू बैरीमोर, क्ले ऐकन, बिली बॉब थॉर्नटन, लियोनेल रिची, केट मिडलटन, ईवा लॉन्गोरिया, कैमरन डियाज, जेसिका सिम्पसन, वैनेसा हजेंस, माइली साइरस को किसी न किसी चीज से एलर्जी है, और अगर आपको अभी तक नहीं पता है तो भी इसकी संभावना है कि आपको भी किसी न किसी चीज से एलर्जी है। 20वीं शताब्दी की शुरुआत तक, ज्यादातर लोगों को एलर्जी का मतलब भी मालूम नहीं था, क्योंकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। जब कोई चीज मौजूद ही नहीं है तो उसके लिए कोई शब्द क्यों होगा? और आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि ऐसी स्‍थिति भी हो, तब भी यह आज की तुलना में यह बहुत दुर्लभ थी।

इसलिए जहां हमारे दादा-दादी लंबे समय तक एलर्जी का सामना किए बिना खुशहाल जीवन बिताये, वहीं हम पहले से ही इसकी विभिन्न किस्मों से कुछ अधिक ही परिचित हैं, जैसे ग्लूटेन, लैक्टोज, मूंगफली, परागकण, धूल, पशुओं की त्‍वचा की परतें, खट्टे फल, शेलफिश, सोया, दालचीनी, जायफल, लहसुन, जई, कीट डंक, लेटेक्स आदि।

तो वह क्या था जिसने पुरानी पीढ़ी को लगभग अजेय बना दिया था? अगर इसे एक शब्द में कहना हो तो हम कहेंगे - जीवन शैली।


1. उनके आहार में ताजे, मौसमी फल और सब्जियां शामिल रहते थे -


आज, हम अपने विटामिनों की जरूरत पूरा करने के लिए डिब्बाबंद फल और डिब्बाबंद सब्जियों पर निर्भर हैं, और इन फलों और सब्जियों में रसायन मिलाये जाते हैं ताकि वे डिब्‍बे में बंद होने के एक हफ्ते बाद भी ताजा दिखें। लेकिन पहले के समय में हर घर में एक छोटा बगीचा होता था, जहां पूरा परिवार बागवानी करता था। आप पूछेंगे कि उन्हें समय कैसे मिलता था। तो समझे लें कि जिस समय को हम आज सोशल मीडिया पर बिता देते हैं, उसी समय में वे बागवानी कर लेते थे। हालांकि अब हमें एक या दो फल खाने के लिए लगातार याद दिलाना पड़ता है, वे लोग भोजन से पहले या बाद में, नियमित दिनचर्या के रूप में फल खाते रहते थे। यह भी सच है कि तब संसाधन सीमित थे, इसलिए कुछ हद तक हर कोई ‘बाहरी’ चीजों का उपभोग नहीं कर सकता था, इसलिए उन्होंने मौसमी फलों और सब्जियों को चुना, जिससे उनके लिए पोषक तत्वों का मौसमी चक्र सुनिश्चित रहा  और उनको इसका फायदा भी मिला।

भोजन से एलर्जी

 

2. उन्होंने विज्ञापित आहार नहीं लिया, अपने शरीर के लिए प्रतिबंधात्मक चीजों का सेवन नहीं किया।


जब भोजन उपलब्ध था, तभी खाया – आप महसूस कर सकते हैं कि वे विलासिता के दिन नहीं थे, और अगर आप शाही परिवार के थे, तो संभावना यही है कि आप बहुत सामान्‍य और विनम्र जीवन जीते थे, यहां तक ​​कि कई बार भूखे भी रहते थे। कभी-कभी खाने के लिए भोजन होता था, और कभी-कभी नहीं भी होता था, इसलिए अतिवृद्धि और मोटापे की बात कभी नहीं रही। वे कभी भी विज्ञापित आहारों, बाजार की चालबाजियों, कैलोरी की गिनती और अन्य विनाशकारी सोच के शिकार नहीं हुए, और उनकी आदतें पूरी तरह से स्वस्थ थीं।

3. उन्होंने बिल्‍कुल शुरुआती चरणों का पालन करते हुए घर पर खाना बनाया-


उन्‍होंने कोई रेडी-टू-ईट, लो-कैलोरी, लो-फैट, या अन्य तरह के प्रयोगशाला में बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया। सलाद ड्रेसिंग से लेकर सब कुछ घर का बना होता था। इन दिनों भले ही आप घर पर सलाद बनाते हों, आप जो ड्रेसिंग चुनते हैं, वह संभवतः बोतल वाली ही होती है, और यह बताने की जरूरत नहीं है कि बोतल वाली ड्रेसिंग से सलाद से मिलने वाले लाभ आपको नहीं मिलते। लेकिन यह कैसे सच है? इसे अगले पैराग्राफ में देखें।

4. वे जीएमओ खाद्य पदार्थ, फूड एडिटिव्‍स, स्टेबलाइजर्स, या थिकेनर्स नहीं खाते थे -


हमारे दादा-दादी भाग्‍यशाली रहे कि उनके समय में एडिटिव्‍स, एंटीबायोटिक्स, स्टेबलाइजर्स, थिकेनर्स, जीएमओ खाद्य पदार्थ, और हार्मोन नहीं थे, जिससे उपको अपने जीवन को बनाए रखने और खाद्य उत्पादकों की जेबें भरने से खुद को बचाये रखने में मदद मिली। इसलिए उन्होंने केवल बिना मिलावट वाला शुद्ध भोजन खाया।

5. उन्हें अधिकतम धूप मिली -


मैं नहीं जानती कि आपकी समस्‍याएं क्या हैं, लेकिन आपकी समस्याओं का जवाब विटामिन डी है। पुराने समय में, परिवहन के कई तरह के साधन उपलब्‍ध नहीं थे और खुद की अपनी कार रखने की बात तो भूल ही जाएं, सड़क पर कार देखना ही एक दुर्लभ बात थी। इसलिए 10 किमी से कम की दूरी रोज पैदल चलकर पूरी की जाती थी, जो कि बहुत अच्छा व्यायाम है और धूप भी उपलब्‍ध कराता है! लोग अपने स्कूलों, कार्यस्थलों, किराने की दुकानों आदि पर नियमित तौर पर पैदल ही जाते थे। विटामिन डी स्वस्थ शारीरिक प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है, और यह प्रतिरक्षा प्रणाली ही है जो बीमारियों का प्रतिरोध और बचाव करने की क्षमता के साथ, हमारे शरीर में एलर्जी की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती है।

आप पूछ सकते हैं कि इसका मतलब क्‍या निकला?


जब आप बासी/खराब खाना खाते हैं तो क्या होता है? आप बीमार पड़ जाते हैं। जब आप धूम्रपान करते हैं या तंबाकू चबाते हैं तो क्या होता है? आप कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। जब आप बहुत ज्यादा शराब पीते हैं तो क्या होता है? आप बुरे हैंगओवर, और अन्‍य समस्‍याओं के शिकार होते हैं। और जब आप संतुलित आहार नहीं लेते हैं तो क्या होता है? आपको पोषण संबंधी कमियां हो जाती हैं।

भोजन से एलर्जी

छवि स्रोत: http://www.ctsinuscenter.com/

पोषण हमारे शरीर में प्रत्येक कोशिका को प्रभावित करता है; इसी तरह हमारी जीवनशैली भी असर डालती है। तो अगर ये 2 चीजें सही नहीं हैं, तो आपके शरीर की प्रत्येक कोशिका, प्रत्येक ऊतक और आपके शरीर के सभी अंगों की सेहत पर असर पड़ेगा। सीधे शब्दों में कहें, तो हमारे भोजन की खराब गुणवत्ता और जीवनशैली के कारण हम पुराने जमाने से कहीं अधिक एलर्जी और संवेदनशीलता की समस्‍या से जूझते हैं। पुराने समय की तुलना में आज वायु, जल और भूमि अधिक प्रदूषित हैं। तनाव का स्तर अधिक है, हमारी जीवन शैली अधिक ठहरी हुई और गतिहीन है, और हमारा भोजन लगभग विषाक्त है। इसलिए जब तक हम सब मिलकर पृथ्वी को फिर से रहने लायक बनाने का काम नहीं करेंगे, तब तक हम बीमार पड़ते रहेंगे। तो अब आप किस बात का इंतजार कर रहे हैं? आइए, अब शुरूआत करते हैं!

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